लंबी और छोटी दोनों तरह की वायदा/FUTURES(&0PTIONS) स्थितियों को शामिल करने वाली रणनीति, जिसमें हारने वाली स्थिति से बाहर निकला जाता है और जीतने वाली स्थिति को बढ़ाया जाता है, एक सामान्य व्यापारिक दृष्टिकोण है। मान लीजिए कि आप वायदा में लंबे समय से (खरीद) और कम समय में (बेच) निवेश कर रहे हैं, और कम निवेश की स्थिति में घाटा हो रहा है। इसके बाद आप घाटे वाली छोटी स्थिति से बाहर निकल जाएंगे और अपनी लंबी स्थिति को मूल आकार से चार गुना बढ़ा लेंगे।
उदाहरण:
1. प्रारंभिक स्थिति:
आप एक ही अंतर्निहित परिसंपत्ति पर 1 वायदा अनुबंध
की लंबी स्थिति और 1 वायदा अनुबंध की छोटी स्थिति लेते हैं।
2. बाजार की चाल:
अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत बढ़ जाती है, जिससे आपकी लंबी
स्थिति में लाभ होता है और आपकी छोटी स्थिति में हानि होती है।
3. हानि की स्थिति से बाहर निकलें:
आप अपनी शॉर्ट पोजीशन को बंद कर देते हैं, नुकसान उठाते
हैं, और पूंजी मुक्त कर लेते हैं।
4. लाभ स्थिति प्रवर्धन:
फिर आप उसी अंतर्निहित परिसंपत्ति पर मूल दीर्घ स्थिति (4
वायदा अनुबंध) का 4 गुना हिस्सा लेते हैं।
उदाहरण गणना:
आरंभिक निवेश:
आप रु. 1,00,000 रुपये से अधिक का निवेश करके लंबी और
छोटी दोनों स्थिति (प्रत्येक पर 50,000 रुपये) लें।
दीर्घ स्थिति लाभ:
अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत 5 अंक बढ़ जाती
है। आपकी लॉन्ग पोजीशन से रु. 15,000 (5 अंक * रु. 3,000 प्रति अंक)।
लघु स्थिति हानि:
अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत 5 अंक बढ़ जाती
है। आपकी शॉर्ट पोजीशन से रु. 15,000 (5 अंक * रु. 3,000 प्रति अंक)।
कुल लाभ (हानि:
आपका प्रारंभिक निवेश रु. 1,00,000 रुपये की राशि
आपके लॉन्ग पोजीशन लाभ और शॉर्ट पोजीशन घाटे से ऑफसेट हो जाती है, जिसके
परिणामस्वरूप रु. 1,00,000 का शुद्ध लाभ/हानि होती है। 0.
प्रवर्धन:
आप छोटी स्थिति से बाहर निकलें और अब रु. 50,000 * 4 = रु.
2,00,000 लंबी स्थिति में।
बाजार की चाल:
कीमत में वृद्धि जारी है।
लाभ:
आपकी प्रवर्धित लंबी स्थिति अब एक महत्वपूर्ण लाभ उत्पन्न करती है।
उदाहरण के लिए, यदि कीमत 5 अंक और बढ़ जाती है, तो आपकी लॉन्ग पोजीशन में 100
रुपये का लाभ होगा। 60,000 (5 अंक * रु. 12,000
प्रति अंक)।
स्पष्टीकरण:
इस रणनीति का उद्देश्य मूल्य प्रवृत्ति से लाभ उठाना है:
प्रारंभिक जोखिम को निष्प्रभावी करना:
प्रारंभिक लंबी और छोटी स्थितियाँ किसी भी दिशा में मूल्य अस्थिरता
से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं, कम से कम तब तक जब तक कि हानि की
स्थिति बंद न हो जाए और जीतने वाली स्थिति बढ़ न जाए।
लाभ में वृद्धि:
हारने वाली स्थिति को बंद करके और जीतने वाली स्थिति में मूल राशि का
चार गुना निवेश करके, व्यापारी प्रवृत्ति जारी रहने पर अपने संभावित रिटर्न को बढ़ाने का
प्रयास करता है।
महत्वपूर्ण बातें:
जोखिम प्रबंधन:
यह रणनीति जोखिमपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यह
बाजार के एक ही पक्ष पर निवेश को केंद्रित करती है। कीमत में अचानक परिवर्तन से
भारी नुकसान हो सकता है।
मार्जिन आवश्यकताएँ:
वायदा कारोबार में मार्जिन की आवश्यकता होती है, तथा
बड़ी स्थिति के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता हो सकती है।
विशेषज्ञता:
इस रणनीति के लिए वायदा कारोबार, जोखिम प्रबंधन
और तकनीकी विश्लेषण की अच्छी समझ की आवश्यकता होती है।
बाजार की स्थितियाँ:
इस रणनीति की सफलता बाजार की प्रत्याशित दिशा में आगे बढ़ने की
क्षमता पर निर्भर करती है।
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